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read ð eBook, PDF or Kindle ePUB Ê Javed Akhtar

तरकश ترکشTarkashAmazing Ebook तरकश ترکشTarkash author Javed. Just in case you are thinking of reading this book I'd suggest please avoidI liked the initial chapter where Akhtar has given the details about his childhood and his journey It's very interestingly written and very wellI liked some of the linescouplets here and there in the book and a few of the poems like Do Raahaa Suraj Vakt etc The language used by the poet is too heavy and several Urdu words are hard to understand Besides this the writing and the poems come across as too filmly and many a times boring hence making the reading very tiring It seemed liked the author wanted to show off his Urdu speaking skills unnecessary I lost track of the actual poem many a times because of the unnecessary use of heavy Urdu wordsSelected this book because of the popularity of the lyrics written by the famed lyricist but this book failed to interest and impress me

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And others pages and has a text language like Urdu isbn. Each and every poem of Javed saheb is heart touching and niceish Best part of the book was the 'About Me' section in beginning which wins hearts This section describe his earlier struggling life in a beautiful way He uses Urdu words too but overall his poems are in understandable simple language with deep meanings that spread a magic of positive energy even in bad times and sad moments The subject of his writings often is from daily routine life of any common man but sometimes he also write upon other issues like political leadership religious matters imaginations poem to his own daughter etc Once you start reading Tarkash you start enjoying his writings and want to get and A must read book for Hindi and Urdu readersFor Hindi Readersएक बेहतरीन और उम्दा पुस्तक। रचनाएँ भी एक से बढ़कर एक। ज़ावेद साहब की लगभग हर कविता दिलकश और तारीफ़ ए क़ाबिल है। वैसे इस पुस्तक में कविताएँ तो बेहतरीन थी ही थी लेकिन पुस्तक के प्रारंभ में दिया गया About Me आलेख तो जैसे आपका दिल ही जीत लेता है। पुस्तक में यह खास हिस्सा उनकी लड़कपन वाली आयु के इर्द गिर्द का है जब संघर्षशील ज़ावेद साहब क्या थे और बाद में क्या से क्या हो गए। बड़ी ही नाजुक घड़ियाँ मालूम पड़ती थी कि जाने कल क्या हो जाय। इसी संघर्ष यात्रा में उनकी मुलाकात नए लोगों से भी होती है। उनके साथ जुड़कर लगभग समान कठिनाइयों का सामना करता एक साथी जो बाद में नशे की लत में पड़कर एक वक्त के बाद ये संसार छोड़ जाता है और जिसके बारे में वे खुद कहते हैं कि बस एक सहारा मिल जाता तो वो भी मेरी तरह बच सकता था। इस आलेख में उनके इर्द गिर्द के खास लोगों का भी जिक्र है मसलन उनके पिता और पिता से उनका रिश्ता उनकी नानी उनकी पत्नी वगैरह। बहुत ही सारांश में जीवन के उस खास हिस्से का बहुत कुछ और बहुत ही सुंदर अंदाज़ में लिख दिया गया है।ज़ावेद साहब जिस घराने से हैं वहाँ उर्दू बड़े ही नाज़ से पली बढ़ी हैं और ऐसे में खुद वे उर्दू का प्रयोग कैसे नहीं कर सकते थे। हिंदी और उर्दू के समागम से वे अपने लेखन में बहुत ही गहरे अर्थ उकेर देते हैं लेकिन बावजूद इसके उनकी कविताओं की भाषा बेहद सरल होती है और आसानी से समझी जा सकती है। कविताओं की जहाँ बात करूँ तो मुझे जो खास रचनाएँ पसंद आई वे हैं★ दुःख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग★ मुझको यकीं है सच कहती थी जो भी अम्मी कहती थी★ मैं पा न सका कभी इस ख़लिश से छुटकारा★ वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही हैमेरा व्यक्तिगत अनुभव कहता है कि किसी को भी अपने बुरे दौर अथवा दुःखद पलों में ज़ावेद साहब की कविताएं जरूर पढ़नी चाहिए क्योंकि उनकी कविताएँ चाहे किसी भी विषय पर हों उल्लास प्रेम व्यंग्य या ग़म उनसे सकारात्मक शक्ति का एक जादू हमेशा बिखरता है। थके हुए मन को एक नर्म मुलायम तकिया है 'तरकश'। इसे पढ़िए अगर आप दिनभर की धूप धूल धुंध में हुई भागमभाग के बाद किसी हरे भरे बाग में एक साँझ बिताना चाहते हों अगर आप बहुत चल लेने के बाद थोड़ा रुककर ठहरना चाहते हों मशीनी दुनिया की गिरफ्त में अगर आप दो पल मन को टटोल लेना चाहते हों तेजी से भागते जा रहे वक़्त में कुछ लम्हें रोक लेना चाहते हों।और अंत मेंजो मुझको ज़िंदा जला रहे हैं वो बेखबर हैकि मेरी ज़ंजीर धीरे धीरे पिघल रही हैमैं कत्ल तो हो गया तुम्हारी गली में लेकिनमिरे लहू से तुम्हारी दीवार गल रही है

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characters तरकश ترکشTarkash ☆ eBook, PDF or Kindle ePUB Û [Read] ➼ तरकश ترکشTarkash ➹ Javed Akhtar – Gwairsoft.co.uk Amazing Ebook, तरकश ترکشTarkash author Javed Akhtar This is the best favorite book format Hardcover and others 163 pages and has a text langAkhtar This is the best favorite book format Hardcover. Mashallah what a bookI chanced upon this while on my visit to the library and oh my God the experience I had while reading this bookI finished this book in around 15 hours given that I was eating his words literallyDefinitely recommended